एसिडम सल्फ्युरिकम के फायदे | Acidum Sulphuricum Uses in Hindi

ऐसिड सल्फ्युरिकम ( Acid Sulphuricum )

[ गन्धक का तेजाब – और २x शक्ति पानीमें, ३x शक्ति डाइल्यूट अलकॉहलमें और बादकी शक्तियाँ अलकॉहलमें तैयार होती हैं ] – यह शराब पीने के कारण पैदा होनेवाली बीमारियों या जिन्होंने शराब पीकर अपना स्वास्थ्य नष्ट कर डाला है उनके लिए अधिक उपयोगी है। नक्स वोमिका भी – शराब पीनेके कारण पैदा हुई अधिकांश बीमारियों की महौषधि है; पर जब रोगी का पेट बहुत खराब हो जाता है, जो कुछ पीता है सब अम्ल हो जाता है, पेट और कलेजेमें जलन होती है, खट्टी के होती है और रोगी रक्त-शून्य हो जाता है—उस समय ऐसिड सल्फसे बहुत ज्यादा फायदा होता है। यदि यकृत बढ़ गया हो, और पेटकी गड़बड़ीके कारण सूखी खाँसी हो गयी हो तो उसमें भी यह लाभ करती है ( हैजामें या दूसरी बीमारीमें दस्तके साथ लगातार के व खट्टी के, पेट, गलामें जलन रहनेपर ऐसिड टार्टरिक अधिक लाभदायक है )।

त्वचा, म्यूकस-टीश श्लेष्मिक तन्तु), अन्ननली और श्वासनली पथपर सल्फ्युरिक ऐसिडकी प्रधान किया होती है। परित्रगत लक्षण:

(१) हमेशा व्यस्त, सभी काम बहुत जल्दी-जल्दी करता है; (२) दर्द खूब धीरे-धीरे बढ़ता है, पर जब बढ़ता बढ़ता चरम सीमापर पहुँच जाता है तब एकाएक घट जाता है; (३) वृद्ध मनुष्य या अन्य किसीको चोटकी जगह पर गैंग्रीन (सड़न) होनेके लक्षण ; (४) ताकत न रहनेके कारण किसी सवालका जवाव देनेकी इच्छा न होना; (५) बच्चेको खूब नहला-धुला और पोंछ देनेपर भी खट्टी गन्ध आती है ( मैग कार्ब, रियुम, हिपर ) ; (६) मुँह, मसूढ़े या मुँह के भीतर सभी जगह जखम; (७) पुरानी कलेजेकी जलन, खट्टी डकार आना, दाँत खट्टो, खट्टी के ( रोबिनिया ) ; (८) शरीर के सभी स्थानसे काले रंगका (६) गिर जाने या चोट लगनेकी वजहसे मस्तिष्ककी क्रियाका न होना ( concussion ) ; (१०) शरीर ठण्डा, पर समूचा शरीर पसीनेसे तर रहता है ; (११) पहले शरीर आगकी तरह गरम, उसके बाद पसीना व उसके साथ कँपकँपी । , रक्तस्राव ;

बवासीर – शराबियोंके बवासीरका मसा जब बहुत बड़ा हो जाता है. और उससे मलद्वार रुक जाता है, जलन होती है और रस टपकता है, उस समय यह लाभ करता है। ऐसिड म्यूर भी इस लक्षण में विशेष फायदेमन्द है, पर उसमें स्पर्श बिलकुल ही सहन नहीं होता। ऐसिड सल्फमें – मलद्वारसे हमेशा ही रस गिरा करता है, कपड़ा मींगा रहता है (इस्क्यूलस देखिये ) । यह इनकरसिरेटेड हर्निया ( इसमें आँत उतरकर फिर नहीं चढ़ती या चढ़कर भी फिर उतर आती है ) में भी लाभ करता है (नक्स वोमिका अध्याय देखिये ) ।

– मुँहके घाव – यदि रोगी बहुत दिनों तक कोई बीमारी भोगता रहे और उसके बाद मुँहमें घाव हो जाय तो – ऐसिड सल्फ लाभ करती है। छोटे बच्चोंके अतिसारके साथ मुँहमें घाव ( particularly in children with marasmus अर्थात् खासकर उन बच्चोंको जिन्हें सुखण्डी रोगके साथ दस्त आते हों), बहुत लार गिरता है, खट्टी के होती है, शरीरसे खट्टी गन्ध निकलती है; बच्चोंकों इसके साथ ही व्यकसर खाँसी रहती है और खाँसनेके बाद डकार आती है।

वमन – खट्टी के के साथ छातीमें जलन, खट्टी डकार, दाँत खट्टे हो जाना ( रोबिनिया नामक दवा में भी यह लक्षण है ) । गर्भावस्था में सवेरे खट्टी के, के होनेके पहले खाँसी आती है। होता है। भोजन कर लेनेके बाद ऊपरी पेटमें दर्द

अम्लकी बीमारी- पेट में बहुत अधिक वायु होनेके साथ रोगी जोरजोरसे बदबूदार डकार लेता है। इस लक्षण में ऐसिड सैलिसाइलिक लाभ करती है; पर यदि खट्टी डकार; खट्टी के, कलेजे में जलन, पीले रङ्गका पाखाना, कमजोरी इत्यादि लक्षण रहें, तो–ऐसिड सल्फ लाभ करती है।

– ऐसिड सैलिसाइलिक – यह सड़नेके लक्षण शुदा मन्दाग्नि (डिस्पेप्सिया ) की बहुत बढ़िया दवा है, यदि खायी हुई सामग्री पेटमें सड़े, बदबूदार और खट्टी डकार आती हो, गरम डकार आती हो, पेट फूले, दस्तका रंग गहरा हरा, जीभका रंग सीसेकी तरह काला दिखाई दे, तो यह लाभ करती है।

दुर्बलता और कम्पन-ठीक कमजोरी तो नहीं किन्तु खूब कमजोर आदमीकी तरह शरीरके भीतर एक तरहकी कँपकँपी अनुभव होना। रोगीको इससे बहुत तकलीफ होती है और डरता है कि कोई कड़ी बीमारी हो गयी है। इन ऊपर कही बीमारियोंके अलावा, नीचे लिखी बीमारियों में भी

सल्फ्युरिक ऐसिडका स्मरण करना चाहिये :

सर्दी लगकर आँखों में प्रदाह, हेक्टिक ज्वर (क्षय ज्वर ), हिमॉप्टिसिस ( रक्तोत्कास), टियुबरक्युलोसिस ( यक्ष्मा), एक तरहकी अजीर्णकी बीमारी ( डिस्पेप्सिया ) जिसमें रोगी समझता है कि उसकी पाकस्थली ठण्डी और कमजोर है- इसलिए चाय, ब्राण्डी वगैरह उत्तेजक पदार्थ पीना चाहता है। गर्भावस्था में वमन, पेटकी गड़बड़ीकी वजहसे खाँसी, खाँसीके बाद डकार आना, टान्सलाइटिस ( तालुमूल-प्रदाह ), डिपथीरिया, हमेशा नींद आनेका भाव, पतली चीजें पीनेपर नाकसे बाहर निकल आना, बढ़ी हुई प्लीहा, आँत उतरना ( हर्निया), चोट लगकर कुचल जाना, रोगवाली जगहका बहुत दिनों तक नीला रहना, हिमोरेजिक पर्युरा (त्वचाके नीचे रक्त इकट्ठा होने की वजह से त्वचा जगह-जगह लाल हो जाना ) – ये सब लक्षण भी इस ऐसिडके अन्तर्गत हैं।

द्रष्टव्य – (१) डॉ० बोरिकका कहना है – मूल सल्फ्युरिक ऐसिड १ भाग ३ भाग स्पिरिटमें मिलाकर, उसकी १० से १५ बूँद मात्रा में नित्य तीन बार ३-४ सप्ताह तक सेवन करनेसे शराब पीनेकी अदम्य इच्छा भी दूर हो जाती है।

एशियाटिक कॉलेरा ( हैजा ) में – १५ बूँद ऐसिड सल्फ डिल १ पाव जलमें मिलाकर उसमें से २-२ चम्मचकी मात्रामें १५ मिनटके अन्तरसे पहले ५-७ बार देकर उसके बाद चिकित्सा आरम्भ करनेसे कोमा बेसिलाइ मर जाकर दवाकी क्रिया शीघ्र होगी। चिकित्सक भी यदि यह सेवन कर रोगीको देखने जाये तो कॉलेराके आक्रमणसे रक्षा पायेंगे।

यदि शराब या स्पिरिट विषकी मात्रामें पीकर कोई बेहोश हो जाये, तो जब तक कम्पन पैदा हो जाये तब तक उसके माथे पर ठण्डा पानी ढालना चाहिए। प्रत्येक १०-१५ मिनटका अन्तर देकर, नाकके आगे ‘स्ट्रॉस एमोनिया’ की शीशी रखें और ऐसिड सल्फ- डिल ८ – १० बूँद या विनिगर २-१ चायचम्मचकी मात्रा में आध छँटाक पानीके साथ, एक घण्टेके अन्तरसे कई मात्राएँ पिलायें तथा जब तक पूरा-पूरा होश न आ जाय और स्वस्थ न हो जाये, तब तक सोने न दें। स्टॉमक-पम्पसे वमन करा देनेपर भी अकसर बहुत जल्द लाभ होता है ।

– प्लीहा – मैलेरिया या स्वल्पविराम ज्वरके बाद अगर प्लीहा बढ़ जाय और प्लीहा में दर्द रहे तो — ऐसिड सल्फ लाभ करती है, प्लीहा और यकृतकी प्रधान दवाएँ— सियानोथस और चियोनैन्थस ( रोहितक व किरायत देखें )। वृद्धि—छूने-रगड़नेपर, सवेरे, सर्दीमें, ठण्डी चीजें पीनेपर, शराब पीनेपर, सन्ध्यामें और रातमें ।

ह्रास — उत्तापसे, रोगवाली करवट सोनेसे, विश्रामसे ।

क्रियानाशक – पल्सेटिला ।

सम्बन्ध – आर्निका, कैलेण्डुला, लिडम, रूटा, सिम्फाइटमके सदृश । क्रियाका स्थितिकाल – ३० – ४० दिन । क्रम – ६, २०० शक्ति ।

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